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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

रीटा कोठारी का कॉलम:हमारे यहां ‘याद’ पर कितने गीत और कितने स्मारक हैं

रीटा कोठारी का कॉलम:हमारे यहां ‘याद’ पर कितने गीत और कितने स्मारक हैं

सुबह से मन में हलचल हो रही है। उठते ही जब बालकनी का दरवाजा खोला, ताकि पौधों के सान्निध्य में अखबार पढ़ा जाए तो एक फड़फड़ाते कबूतर को देखकर तुरंत दरवाजा बंद कर दिया। मेरी बालकनी में जाली लगी हुई है, ताकि कबूतर न आएं, पर एक कोने से जाली फट गयी थी। बहरहाल, मैं कमरे में बैठ गई और सोचा कबूतर अपना रास्ता ढूंढकर वापिस उसी फटी हुई जाली से निकल जाएगा। वही हुआ। किंतु कुछ देर बाद वह फिर से आया और फिर से फंस गया।

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