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बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:सुमिरन हल्के-फुल्के माहौल में हो तो परिणाम गहरा होगा

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:सुमिरन हल्के-फुल्के माहौल में हो तो परिणाम गहरा होगा

हमारी नई पीढ़ी सोशल मीडिया से जरूरत से ज्यादा जुड़ती जा रही है। लेकिन जितने ज्यादा लोग गैजेट के साथ होंगे, यह पीढ़ी उतनी ही आइसोलेशन में जाएगी। इसके हाथ अवसाद भी लग सकता है। तो घर के बड़े लोग क्या करें? आजकल एक शब्द चलता है मॉम-डैड गिल्ट। कई माता-पिता को अफसोस है कि हम अपने बच्चों को कुछ दे नहीं पाए। मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि बच्चों को कुछ देने के लिए सबसे अच्छा समय तब है, जब वो सोने जाएं तो आप उनके साथ रहें।

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