हममें से ज्यादातर को याद होगा कि हम परिवार के साथ डिनर टेबल पर बैठ कर आंखें बंद किए उन प्रार्थनाओं को दोहराते थे, जिन्हें पिताजी बोलते थे। जब हम पूछते कि इन प्रार्थनाओं का मतलब क्या है तो वे समझाते कि यह ईश्वर के प्रति धन्यवाद जताने का तरीका है, जिसने परिवार को इकट्ठा होकर शांति से भोजन करने में मदद की। बचपन में हमने आभार जताना सीखा। आज भी हम अपने बच्चों को थैंक यू कहने की अहमियत सिखाते हैं।
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