सुलतानपुर गौर की आवाज ब्यूरो।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे जिले के किसानों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। जिले के 3,97,645 किसानों को इस किस्त का लाभ मिलने की जानकारी दी गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से गुजरात में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किसानों के खातों में सम्मान निधि की राशि भेजे जाने की बात कही गई है। हालांकि, किसानों के खातों में धनराशि पहुंचने की पुष्टि भुगतान जारी होने के बाद ही होगी।
पिछली किस्त से बढ़े 7,804 लाभार्थी
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त में जिले के 3,89,841 किसानों को लाभ मिला था। इस बार लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 3,97,645 हो गई है। इस तरह पिछली किस्त की तुलना में 7,804 अधिक किसानों को योजना के दायरे में शामिल किया गया है। लाभार्थियों की संख्या में हुई यह वृद्धि उन किसानों के लिए राहत की खबर है, जो पहले किसी कारण से योजना का लाभ नहीं ले पा रहे थे।
अभिलेखों की गड़बड़ी दूर कराने वालों को भी लाभ की उम्मीद
योजना का लाभ मिलने में अभिलेखों में त्रुटि और अन्य प्रक्रियागत समस्याएं बाधा बनती हैं। जानकारी के अनुसार, जिन किसानों ने अपनी समस्याओं का समाधान करा लिया है और उनका डाटा दुरुस्त कर दिया गया है, उन्हें भी इस बार लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, किस्त का भुगतान किसान की पात्रता और विभागीय अभिलेखों के सत्यापन के आधार पर ही होगा।
सालाना मिलते हैं छह हजार रुपये
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को साल में छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह धनराशि दो-दो हजार रुपये की तीन किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। योजना का उद्देश्य किसानों को खेती-किसानी से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में आर्थिक मदद देना है। इससे किसान बीज, खाद और अन्य कृषि संबंधी खर्चों में सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
खाते में राशि नहीं आए तो करें यह काम
किस्त जारी होने के बाद भी जिन किसानों के खाते में धनराशि नहीं पहुंचे, वे पीएम-किसान पोर्टल पर अपना लाभार्थी स्टेटस देख सकते हैं। इसके साथ ही ई-केवाईसी, बैंक खाते और आधार से संबंधित विवरण की जांच कर लें। समस्या बने रहने पर संबंधित कृषि विभाग के कार्यालय या अधिकृत सहायता केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।जिले के करीब चार लाख किसानों की नजर अब सम्मान निधि की अगली किस्त पर टिकी है। लाभार्थियों की संख्या बढ़ने से अधिक किसानों को आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।
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