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शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

कई गांवों में फसल गिरने से बढ़ी किसानों की चिंता, कटाई की लागत बढ़ने के साथ बालियों के सड़ने और अंकुरण का खतरा

आजमगढ़ गौर की आवाज ब्यूरो मो  सफदर खान। फूलपुर क्षेत्र में हुई बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। खेतों में पकने की कगार पर पहुंच चुकी धान की फसल तेज…

कई गांवों में फसल गिरने से बढ़ी किसानों की चिंता, कटाई की लागत बढ़ने के साथ बालियों के सड़ने और अंकुरण का खतरा
कई गांवों में फसल गिरने से बढ़ी किसानों की चिंता, कटाई की लागत बढ़ने के साथ बालियों के सड़ने और अंकुरण का खतरा

आजमगढ़ गौर की आवाज ब्यूरो मो  सफदर खान। फूलपुर क्षेत्र में हुई बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेरना शुरू कर दिया है। खेतों में पकने की कगार पर पहुंच चुकी धान की फसल तेज हवा के झोंकों को बर्दाश्त नहीं कर सकी। देखते ही देखते लहलहाती फसल खेतों में जमीन पर बिछ गई। कई खेतों में अधपकी धान की फसल गिरने से किसानों के सामने अब अपनी उपज बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। फसल को हुए नुकसान की आशंका से किसान परेशान हैं।

        बारिश के बाद तेज हवाओं ने मचाई तबाही

मौसम विभाग की ओर से बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी होने के बाद से ही किसान चिंतित थे। पहले से खेतों में नमी होने के कारण धान के पौधों की पकड़ कमजोर हो गई थी। इसी बीच रुक-रुककर हुई बारिश ने खेतों में नमी और बढ़ा दी। इसके बाद रात में चली तेज हवाओं ने खड़ी धान की फसल को जमीन पर गिरा दिया। सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचे तो उनकी आंखों के सामने महीनों की मेहनत बर्बाद होती नजर आई।

         बालियों के सड़ने और अंकुरण का खतरा

फसल गिरने के बाद किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खेतों में पानी जमा होने और धान की बालियों के मिट्टी के संपर्क में आने से उनके सड़ने का खतरा बना हुआ है। वहीं, मौसम में नमी बनी रहने पर बालियों में दोबारा अंकुरण होने की आशंका भी किसानों को सता रही है। इससे धान की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

   कटाई में बढ़ेगी लागत, मजदूरों का लेना पड़ेगा सहारा

जमीन पर गिरी धान की फसल की कटाई करना भी आसान नहीं होगा। सामान्य स्थिति में किसान हार्वेस्टर से कम समय और कम खर्च में कटाई करा लेते हैं, लेकिन फसल बिछ जाने के कारण मशीन से कटाई में परेशानी आ सकती है। ऐसे में किसानों को मजदूरों का सहारा लेना पड़ेगा। गिरी हुई फसल को काटने, बोझ बांधने, सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और मड़ाई कराने में अतिरिक्त मेहनत के साथ खर्च भी बढ़ेगा।       सालभर की कमाई पर संकट

किसान मनीष पाल, दशरथ पाल, मो. अनवर और इंद्रेश ने बताया कि धान की फसल तैयार करने में पूरे साल मेहनत करने के साथ खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर काफी पूंजी खर्च करनी पड़ती है। इस समय फसल पकने के करीब थी और किसान कटाई की तैयारी में जुटे थे। इसी बीच बारिश और तेज हवाओं ने उनकी उम्मीदों को झटका दे दिया।किसानों का कहना है कि यदि जल्द मौसम साफ नहीं हुआ और खेतों से पानी नहीं निकला तो नुकसान और बढ़ सकता है। इसके बावजूद वे फसल को खेतों में सड़ने के लिए नहीं छोड़ सकते। अब किसी तरह कटाई कर अपनी उपज बचाने का प्रयास करेंगे, क्योंकि धान की फसल ही उनकी सालभर की आमदनी का प्रमुख सहारा है।

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