दीदारगंज गौर की आवाज ब्यूरो मोहम्मद सफदर खान (आजमगढ़)।अर्नब तूफान ने किसानों की महीनों की मेहनत पर ऐसा कहर बरपाया कि खेतों में लहलहाती फसल देखते ही देखते बर्बादी के मंजर में बदल गई। विकासखंड मार्टिनगंज क्षेत्र के पूरा किशनी गांव के किसान विजय प्रकाश मिश्रा की करीब सात बीघा धान की फसल तूफान की चपेट में आकर बर्बाद हो गई। फसल को हुए नुकसान से किसान के सामने अब परिवार की आजीविका चलाने का संकट खड़ा हो गया है।किसान विजय प्रकाश मिश्रा ने बताया कि धान की फसल तैयार करने के लिए उन्होंने महीनों तक दिन-रात मेहनत की थी। खेती में खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर काफी पैसा खर्च किया था। उन्हें उम्मीद थी कि फसल तैयार होने के बाद अच्छी पैदावार होगी और उससे परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ ही आर्थिक स्थिति में भी सुधार आएगा। लेकिन अचानक आए अर्नब तूफान ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
खेतों में बिछ गई धान की फसल
तूफान के तेज झोंकों और खराब मौसम का असर खेतों में खड़ी धान की फसल पर पड़ा। देखते ही देखते फसल जमीन पर गिर गई और खेतों में नुकसान का मंजर दिखाई देने लगा। सात बीघा में तैयार हो रही फसल को बर्बाद होता देख किसान के सामने अब आर्थिक संकट गहरा गया है। जिस फसल से परिवार के पूरे साल की जरूरतें पूरी होने की उम्मीद थी, उसी के नष्ट होने से किसान की चिंता बढ़ गई है।
खेती में लगी पूंजी डूबने से बढ़ी चिंता
पीड़ित किसान विजय प्रकाश मिश्रा का कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। फसल तैयार करने में काफी पूंजी लगाने के बाद भी प्राकृतिक आपदा ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अब उनके सामने अगली फसल की तैयारी, परिवार का खर्च और रोजी-रोटी चलाने की चुनौती खड़ी हो गई है। किसान को चिंता सता रही है कि फसल का नुकसान होने के बाद आर्थिक स्थिति कैसे संभलेगी।सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग
पीड़ित किसान ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से खेतों में हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण कराकर फसल क्षति का सर्वे कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग और कृषि विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करे, ताकि शासन की ओर से मिलने वाली सहायता और मुआवजे का लाभ मिल सके।अब किसान विजय प्रकाश मिश्रा की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। उन्हें उम्मीद है कि जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द सर्वे कराएंगे और उचित आर्थिक सहायता दिलाने की पहल करेंगे। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसान को राहत कब मिलेगी, यह आने वाला समय बताएगा।
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