देवरिया गौर की आवाज तारकेश्वर गुप्ता।शुक्रवार को आए तेज तूफान और बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से जिले के सोहनपुर, बभनौली, जंजीरहा, खोराबार, नोनार पांडेय, रघुनाथपुर, रामपुर बुजुर्ग, बलुआ और सिकरहटा समेत आसपास के कई गांवों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसलें तेज हवा के कारण जमीन पर गिर गईं, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। अचानक बदले मौसम ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।तूफान के दौरान तेज हवाओं और बारिश का असर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई दिया। कई खेतों में फसलें बिछ गईं तो कहीं बारिश और हवा के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने के लिए उन्होंने खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च किया था। अब फसल खराब होने से उनकी लागत निकल पाना भी मुश्किल दिखाई दे रहा है।
*महीनों की मेहनत पर फिरा पानी*
स्थानीय किसान विजय कुशवाहा, चंद्रमा कुशवाहा, विश्राम गुप्त, विजय गुप्ता, उमेश यादव, भठवां के रणजीत गुप्ता, रामनरेश गुप्ता, राम आशीष सिंह और जयप्रकाश यादव समेत अन्य किसानों ने बताया कि शुक्रवार को आए तूफान से खेती को काफी नुकसान हुआ है। किसानों के मुताबिक पहले से ही खाद, बीज, डीजल और कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाली अन्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण खेती करना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ऐसे में प्राकृतिक आपदा ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।किसानों का कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का मुख्य आधार है। फसल खराब होने से आगामी दिनों में परिवार के भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने की चिंता सताने लगी है। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
*प्रभावित गांवों में सर्वे कराए प्रशासन*
तूफान से प्रभावित ग्रामीण किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित गांवों में जल्द से जल्द फसलों के नुकसान का सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम गांवों में पहुंचकर वास्तविक नुकसान का आकलन करे, ताकि पात्र किसानों को सरकारी सहायता और उचित मुआवजा मिल सके। *सरकार से आर्थिक सहायता की गुहार*
किसानों ने सरकार से गुहार लगाई है कि प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान को गंभीरता से लेते हुए राहत देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। उनका कहना है कि खेती में लगी पूंजी डूबने से परिवार चलाना मुश्किल हो सकता है। अब प्रभावित किसानों की निगाहें जिला प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं। किसानों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी पीड़ा को समझते हुए जल्द राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
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