एडीजी के निरीक्षण की सूचना पर सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे गंभीरपुर थाना, कार्यक्रम निरस्त होने से मायूस लौटे
आजमगढ़ गौर की आवाज ब्यूरो मो सफदर खान।गंभीरपुर थाना क्षेत्र के गौरी गांव की नट बस्ती निवासी 30 वर्षीय शाहरुख खान की हत्या के एक सप्ताह बाद भी पुलिस हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी है। हत्या की वजह और आरोपियों का पता नहीं चलने से परिजनों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बुधवार को वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा के गंभीरपुर थाने में निरीक्षण की सूचना पर सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष थाने पहुंच गए। उन्हें उम्मीद थी कि एडीजी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा और पुलिस की कथित लापरवाही से अवगत कराएंगे, लेकिन निरीक्षण कार्यक्रम निरस्त होने की सूचना पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा।
**लापरवाही का आरोप, पहले ही दी थी सूचना**
मृतक के परिजनों ने गंभीरपुर पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शाहरुख के लापता होने की सूचना घटना से एक दिन पहले डायल 112 और थाने पर दी गई थी। परिजन तहरीर लेकर थाने भी पहुंचे थे और उसे खोजने की गुहार लगाई थी। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की। परिजनों का कहना है कि यदि पुलिस तत्परता दिखाती तो शायद शाहरुख की जान बचाई जा सकती थी।
**गला रेतकर की गई थी हत्या**
गौरी गांव निवासी मुस्तफा के पुत्र शाहरुख खान बोलने में असमर्थ थे। वह पाव रोटी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। बीते 27 तारीख की शाम वह घर नहीं लौटे। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन उनका पता नहीं चला। अगले दिन 28 तारीख की सुबह गांव की नट बस्ती के पास बहा में उनका गला रेता हुआ शव मिला था। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था और थाने का घेराव कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी।
**मुट्ठी में मिले बाल और हथियार की जांच**
हत्याकांड की जांच में घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि शाहरुख के बाएं हाथ की बंद मुट्ठी में कुछ बाल मिले थे। इसके अलावा घटनास्थल से बरामद धारदार हथियार और मृतक के गले में मिला दुपट्टा भी जांच के दायरे में है। फोरेंसिक टीम इन साक्ष्यों की जांच कर रही है। हालांकि, अभी तक पुलिस को कोई निर्णायक सफलता नहीं मिली है।
आधा दर्जन लोगों से पूछताछ की चर्चा
सूत्रों के हवाले से बेकरी मालिक अरशद और नदीम गनी समेत करीब आधा दर्जन लोगों से पूछताछ किए जाने की चर्चा है। पुलिस गौरी गांव और नट बस्ती के सैकड़ों लोगों से पूछताछ कर चुकी है। परिजनों का दावा है कि करीब एक दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही थी। हालांकि, पुलिस ने किसी की गिरफ्तारी अथवा हिरासत में लिए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पूछताछ के दायरे में आए किसी व्यक्ति की हत्याकांड में संलिप्तता भी अभी प्रमाणित नहीं हुई है।
एडीजी से मिलने पहुंचे ग्रामीणों को हुई निराशा
परिजनों का आरोप है कि शुरुआती चार दिनों तक पुलिस परिवार के सदस्यों से ही पूछताछ करती रही। उनका सवाल है कि जब घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं और कई लोगों से पूछताछ की जा रही है तो हत्यारों तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच पा रही है? बुधवार को एडीजी के निरीक्षण की सूचना पर थाने पहुंचे ग्रामीणों को उम्मीद थी कि वरिष्ठ अधिकारी के हस्तक्षेप से जांच में तेजी आएगी। लेकिन कार्यक्रम निरस्त होने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।
फिलहाल एक सप्ताह बाद भी शाहरुख हत्याकांड की गुत्थी नहीं सुलझ सकी है। पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच, जल्द खुलासे और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहा है।

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