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मंगलवार, 3 नवंबर 2026

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे हादसे में घायल प्रशांत की मौत, गांव ने जुटाई थी इलाज के लिए मदद

 जिंदगी बचाने को गांव ने जुटाई मदद, फिर भी हार गए प्रशांत लखनऊ में परीक्षा देकर बाइक से लौटते समय पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुए थे हादसे का शिकार, छह दिन तक अस्पताल में चला इलाजसुल्तानपुर…

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे हादसे में घायल प्रशांत की मौत, गांव ने जुटाई थी इलाज के लिए मदद
पूर्वांचल एक्सप्रेसवे हादसे में घायल प्रशांत की मौत, गांव ने जुटाई थी इलाज के लिए मदद

लखनऊ में परीक्षा देकर बाइक से लौटते समय पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुए थे हादसे का शिकार, छह दिन तक अस्पताल में चला इलाज

सुल्तानपुर गौर की आवाज ब्यूरो।बेटे को बचाने के लिए परिवार अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा और उसकी जिंदगी की उम्मीद में पूरा गांव मदद के लिए आगे आ गया। किसी ने आर्थिक सहयोग दिया तो किसी ने सोशल मीडिया पर अपील की। इलाज के खर्च के लिए क्यूआर कोड जारी कर मदद जुटाई गई। हर किसी को उम्मीद थी कि प्रशांत स्वस्थ होकर घर लौटेंगे, लेकिन छह दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद आखिरकार उनकी सांसें थम गईं। सोमवार देर रात निजी अस्पताल में 32 वर्षीय प्रशांत पांडेय की मौत हो गई। मंगलवार को शव गांव पहुंचा तो परिवार में चीख-पुकार मच गई।जयसिंहपुर कोतवाली क्षेत्र के करमदासपुर गांव निवासी अशोक कुमार पांडेय के बेटे प्रशांत पांडेय 27 अक्टूबर को लखनऊ में परीक्षा देने गए थे। परीक्षा समाप्त होने के बाद वह बाइक से घर लौट रहे थे। शाम करीब छह बजे बल्दीराय थाना क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किलोमीटर 101 पर उनकी बाइक हादसे का शिकार हो गई। दुर्घटना में प्रशांत गंभीर रूप से घायल हो गए।सूचना पर पहुंचे यूपीडा के सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कुमारगंज स्थित सौ शैय्या अस्पताल पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर देखते हुए लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। परिजन उन्हें लेकर ट्रामा सेंटर पहुंचे, लेकिन बेड उपलब्ध नहीं होने पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। प्रशांत कोमा में चले गए थे। चिकित्सक उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे थे।उधर, निजी अस्पताल में इलाज का खर्च लगातार बढ़ने से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। ऐसे मुश्किल समय में ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रशांत की जान बचाने के लिए सहयोग अभियान शुरू किया। क्यूआर कोड जारी कर लोगों से आर्थिक मदद की अपील की गई। गांव और आसपास के लोगों ने भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग किया। परिवार को उम्मीद थी कि लोगों की मदद और दुआओं से प्रशांत की हालत में सुधार होगा, लेकिन तमाम कोशिशें नाकाम रहीं।सोमवार देर रात प्रशांत ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। मंगलवार को शव गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। इसके बाद वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे की मौत से पिता अशोक कुमार पांडेय और मां सीता देवी बदहवास हैं। प्रशांत की मौत से करमदासपुर गांव में शोक का माहौल है। जिस युवक को परीक्षा देकर घर लौटना था, उसकी मौत ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं।

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